पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल, छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति द्वारा अमलेश्वर में चार इंच की श्रीगणेश जी की मूर्ति को टब में किया विसर्जित

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छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति द्वारा लगातार 13वें वर्ष मिट्टी की बनी हुई चार इंच की श्री गणेश जी की मूर्ति शिवपार्क कॉलोनी नगरपालिका परिषद अमलेश्वर में स्थापित की गई थी जिसे दिनांक 26 सितंबर दिन शनिवार को पूरे विधि विधान के साथ टब में विसर्जित किया गया ।
उक्त जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति के वरिष्ठ सलाहकार ललित कुमार बिजौरा एवं अध्यक्ष डॉ.अश्वनी साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्री गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल करते हुए मिट्टी की बनी चार इंच की श्री गणेश जी की मूर्ति शिवपार्क कॉलोनी नगर पालिका परिषद अमलेश्वर में स्थापित की गई थी , जिसे पूरे विधि विधान के साथ टब में विसर्जित किया गया ।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति द्वारा जल प्रदूषण को कम करने लोगों को जागरूक करने एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से चार इंच की श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई थी । छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति के वरिष्ठ सलाहकार ललित कुमार बिजौरा ने बताया कि समिति लगातार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही है अभी बड़े मूर्ति के विसर्जन से पानी प्रदूषित हो रही है तथा छोटे जीव जंतु नष्ट हो रहे हैं , मिट्टी की छोटी प्रतिमाएं स्थापित करने से प्रदूषण को कम किया जा सकता है । मिट्टी की बनी चार इंच की श्रीगणेश जी की मूर्ति को टब में विसर्जित किया गया पश्चात अपशिष्ट मिट्टी एवं जल को पौधरोपण कर उपयोग किया गया । छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति के वरिष्ठ सलाहकार ललित कुमार बिजौरा ने बताया कि “प्रकृति से मिले हैं तो प्रकृति में ही विलीन होना सीखें , आस्था और पर्यावरण का यह अनूठा संगम ही जीवन की असली सत्य है । ” विसर्जन के बाद टब की इस उपजाऊ मिट्टी को पौधे के गमलों में उपयोग करके प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जा सकती है । श्री गणेश जी के विसर्जन कार्यक्रम में विशेष रूप से छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति के वरिष्ठ सलाहकार ललित कुमार बिजौरा , श्रीमती अदिती बिजौरा , दिव्यांश बिजौरा , हर्षवर्धन साहू , यश सिंहा , विवेकानंद जी सहित छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य गण उपस्थित रहे ।

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