जामुल/भयंकर गर्मी के बीच बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती जनता को जब महीनों से गंदा और बदबूदार पानी परोसा जाए, तो सब्र का बांध टूटना लाजमी है। ऐसा ही कुछ नजारा जामुल नगरपालिका में देखने को मिला, जहां पानी की गंभीर समस्या से नाराज होकर भारी संख्या में महिलाओं ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) का घेराव किया।
बोतल में गंदा पानी लेकर पहुंचीं महिलाएं, CMO ने पीने से किया इनकार
महिलाओं का आरोप है कि पिछले कई महीनों से नलों में लगातार दूषित पानी आ रहा है। कभी-कभार ही पानी साफ होता है, अन्यथा यह पीने लायक बिल्कुल नहीं रहता। अपनी शिकायत को पुख्ता करने के लिए महिलाएं अपने साथ नलों से भरा गंदा पानी बोतलों में लेकर अधिकारी के दफ्तर पहुंची थीं।
जब महिलाओं ने वह पानी अधिकारियों को पीने के लिए दिया और पूछा कि क्या यह पानी पीने योग्य है? तो अधिकारियों ने कहा कि हां, यह पीने लायक है। इस पर जब महिलाओं ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “अगर यह साफ है, तो सर आप ही इसे पीकर दिखाइए।” इस पर CMO साहब भड़क गए और बोले, “अब आप तय करेंगी कि मैं क्या पियूं और क्या न पियूं?”
अधिकारी की अजीब सलाह: “गर्मी में पानी उबालकर पियो”
अधिकारियों के रवैये से आहत महिलाओं ने बताया कि समस्या का समाधान करने के बजाय अधिकारी ने उन्हें एक अजीबोगरीब और ‘सुंदर’ सुझाव दे डाला। अधिकारी ने महिलाओं से कहा कि इतनी गर्मी में भी अगर पानी गंदा आ रहा है, तो आप लोग पहले उसे उबालिए, फिर ठंडा कीजिए और पी लीजिए। भयंकर गर्मी में जहां लोग ठंडे पानी के लिए तरस रहे हैं, वहां अधिकारी का ऐसा संवेदनहीन बयान जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
वार्डों के बीच भेदभाव का भी आरोप: टैक्स बराबर, तो व्यवस्था अलग क्यों?
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पालिका प्रशासन पर वार्डों के बीच भेदभाव करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है:
पानी के स्रोत में अंतर: कुछ चुनिंदा 1-2 वार्डों में बोर का साफ और स्वच्छ पानी सप्लाई किया जा रहा है, जबकि बाकी के अधिकांश वार्डों में नदियों का गंदा पानी भेजा जा रहा है।
सप्लाई के समय में भेदभाव: जहां आम वार्डों में दिन में केवल दो बार ही पानी खोला जाता है, वहीं दो-तीन वीआईपी वार्ड ऐसे हैं जहां चार-चार बार (टर्मिनल) पानी की सप्लाई दी जा रही है।
महिलाओं ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि “जब पूरी जनता समान है और सब बराबर टैक्स देते हैं, तो पालिका का व्यवहार अलग-अलग क्यों है? क्या गरीब वार्डों के लोगों को साफ पानी पीने का हक नहीं है?”
मिला आश्वासन, ‘देखते हैं’ मोड में जनता
भारी हंगामे और महिलाओं के कड़े तेवरों को देखते हुए अंततः अधिकारी बैकफुट पर आए। उन्होंने महिलाओं को आश्वासन देते हुए कहा है, “दो-चार दिन का समय दीजिए, सब साफ हो जाएगा।”
फिलहाल महिलाओं ने अधिकारी की बात मानकर दो-चार दिन का इंतजार करने का फैसला किया है। लेकिन महिलाओं का साफ कहना है कि अगर तय समय के भीतर पूरे जामुल में साफ पानी की समान सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।









