पर्यावरण संरक्षण का संदेश – महुदा में मिट्टी के गणेश गढ़ रहे गजानंद चक्रधारी, 20 वर्षों से जारी है पारिवारिक परंपरा

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​पाटन / महुदा,गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच महुदा निवासी मूर्तिकार गजानंद चक्रधारी भगवान श्री गणेश की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गजानंद चक्रधारी ने बताया कि उनके यहाँ भगवान गणराज के साथ-साथ माँ दुर्गा, माता लक्ष्मी और भगवान विश्वकर्मा की सुंदर प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। उनका परिवार पिछले 20 वर्षों से लगातार मूर्ति निर्माण का कार्य कर रहा है।
​अपनी पारिवारिक विरासत के बारे में बात करते हुए गजानंद जी ने बताया कि सबसे पहले उनके पिता स्व. आनंद चक्रधारी जी मूर्तियाँ बनाया करते थे। उनके बाद इस कार्य की कमान उनके भाई ने संभाली। भाई के असामयिक निधन के बाद अब वे स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास आजीविका का और कोई साधन नहीं है। मूर्ति कला ही हमारा मुख्य रोजगार है और इसी से हमारे परिवार की रोजी-रोटी चलती है।”
​उनकी बनाई मूर्तियों की सुंदरता और शुद्धता के कारण कोस-कोस (दूर-दूर) से लोग प्रतिमाएं ले जाने के लिए महुदा पहुँचते हैं।
​मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना की अपील
पर्यावरण की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए मूर्तिकार गजानंद चक्रधारी ने क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु केवल मिट्टी से बनी भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं की ही स्थापना करें, ताकि हमारी नदियाँ, जल स्रोत, जलचर और जमीन रासायनिक रंगों व प्लास्टिक-पीओपी के प्रदूषण से सुरक्षित रहें।

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