आईफा अवार्ड में बिना सरकारी मदद के चमके दुर्ग के रेहान: जापान में आर्म रेसलिंग (पंजा कुश्ती) में जीता रजत पदक, देश के लिए स्वर्ण जीतने का है सपना

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​दुर्ग/ बिना किसी सरकारी सहायता और संसाधनों के अभाव के बावजूद अपने जज्बे और कड़ी मेहनत के दम पर जापान में आयोजित आईफा अवार्ड (IFA Award) में देश के लिए रजत पदक (Silver Medal) जीतकर लौटने वाले रेहान की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। दुर्ग शहर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले रेहान ने साबित कर दिया है कि पक्के इरादों के आगे बड़ी से बड़ी बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।
​टी.वी. से शुरू हुआ सफर और 6 साल की कड़ी मेहनत
​रेहान के आर्म रेसलिंग (पंजा कुश्ती) चैंपियन बनने का सफर टेलीविजन पर मैच देखने के साथ शुरू हुआ था। खेल के प्रति उनके जुनून को देखते हुए उन्होंने स्कूल के दिनों में ही दुर्ग के एक जिम को ज्वाइन कर लिया था। इसके बाद लगातार छह साल तक जी-तोड़ मेहनत की और आखिरकार अपनी मेहनत के दम पर जापान में आयोजित प्रतिष्ठित आईफा अवार्ड्स तक का सफर तय किया। जापान के मंच पर उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया।
​एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए जापान की यात्रा करना और वहां प्रतियोगिता में भाग लेना किसी खुली आंख से सपने देखने जैसा था। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए रेहान ने कई जगहों पर मदद की गुहार लगाई, लेकिन सरकारी मदद न मिलने पर केवल उनके माता-पिता ने ही हर कदम पर उनका साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया।
​सफलता हासिल करने के बाद अब रेहान का अगला और सबसे बड़ा सपना देश के लिए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर लाना है। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि राज्य में पंजा कुश्ती के खेल को बढ़ावा देने और युवाओं को सही मंच प्रदान करने के लिए दुर्ग में भी एक जिम्मेदार खेल अकादमी या फेडरेशन का संचालन किया जाना चाहिए।

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