अम्लेश्वर/पाटन।
पाटन ब्लॉक अंतर्गत उत्तर पाटन क्षेत्र में अवैध कब्जों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने के आरोप लग रहे हैं। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत पाहंदा (अ) का एक नया मामला चर्चा में है, जहां सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की आशंका को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
तालाब और रावण भाटा में अवैध भंडारण का खेल
जानकारी के अनुसार, विगत दिनों एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा गांव के तालाब किनारे सैकड़ों हाईवा मिट्टी का भंडारण किया गया है। वहीं रावण भाटा क्षेत्र में भी पिछले कई वर्षों से रेत का भंडारण धड़ल्ले से किया जा रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इन मामलों में खनिज विभाग कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन भी अब तक पूरी तरह मौन बना हुआ है।
कब्जा करने का नया फॉर्मूला: पहले मलबा, फिर मालिकाना हक
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी जमीन को हड़पने का यह एक सोचा-समझा तरीका है।
सबसे पहले सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी, रेत, मुरूम एवं ईंटों का मलबा (राबिस) रखकर अतिक्रमण की शुरुआत की जाती है।
इसके बाद धीरे-धीरे संबंधित लोग उसी भूमि पर अपना अधिकार जताते हुए स्थायी कब्जा कर लेते हैं।
इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
पंचायत ने कहा- नहीं दी गई कोई अनुमति
ग्राम पंचायत पाहंदा (अ) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत स्तर पर किसी भी व्यक्ति को सरकारी भूमि पर मिट्टी, मुरूम, रेत या अन्य निर्माण सामग्री रखने की कोई लिखित या मौखिक अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का डंप होना स्थानीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में कब तक और क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। फिलहाल यह मुद्दा ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
अधिकारियों के बयान (वर्जन)
”किसी भी व्यक्ति को सरकारी जमीन पर मिट्टी, रेत, मुरूम अथवा राबिस रखने हेतु कोई अनुमति या प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया है।”
— सचिव, ग्राम पंचायत पाहंदा (अ)
”मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थल का निरीक्षण कर जांच की जाएगी तथा नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”
— एसडीएम, पाटन







