भिलाई, नगर पालिक निगम भिलाई में विकास कार्यों के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने और चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर पालिक निगम भिलाई के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह ने छत्तीसगढ़ शासन के उप-मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री को रायपुर में एक औपचारिक आवेदन सौंपकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच राज्य की आर्थिक जांच एजेंसी (E.O.W.) से कराने की मांग की है।
दया सिंह ने तत्कालीन निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और संबंधित तकनीकी अधिकारियों पर प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता, सामान्य सभा की शक्तियों के हनन और गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के सीधे आरोप लगाए हैं।
ज्ञापन में उठाए गए 4 मुख्य बिंदु और गंभीर आरोप:
1. अवैध प्लाटिंग को बढ़ावा और ₹72 लाख के कार्य में धांधली
वार्ड 22 कुरूद शीतला तालाब के दक्षिण मार्ग में 15वें वित्त आयोग के तहत ₹72,30,897 की लागत से डामरीकरण कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय ने महापौर परिषद और सामान्य सभा की वैधानिक स्वीकृति के बिना, मनमाने ढंग से यह कार्य भू-माफियाओं को लाभ पहुँचाने के लिए अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों में कराया। कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब होने के बावजूद, बिना किसी तकनीकी जांच के ठेकेदार को लगभग ₹52 लाख का भुगतान भी कर दिया गया। इसके अलावा, कई स्वीकृत सड़कों का स्थल बदलकर उन्हें अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों में शिफ्ट करने का भी आरोप है।
2. सफाई कर्मियों के PF/ESI का घोटाला और नियम विरुद्ध भुगतान
सफाई ठेकेदार द्वारा सफाई कर्मियों की पीएफ (PF) और ईएसआई (ESI) की राशि जमा नहीं करने के कारण पूर्ववर्ती चार कमिश्नरों ने भुगतान रोकने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन तत्कालीन आयुक्त ने नियमों और पुराने आदेशों को ताक पर रखकर ठेकेदार को करोड़ों रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान कर दिया।
3. पानी टंकी निर्माण में पेनल्टी की अनदेखी और करोड़ों का फायदा
भिलाई निगम क्षेत्र के अंतर्गत 4 नग पानी टंकियों (ओवरहेड सर्विस रिजर्वॉयर्स) के निर्माण में ठेकेदार द्वारा अत्यधिक विलंब किया गया। सरकारी दस्तावेजों में स्पष्ट नोटिंग थी कि समय पर काम न होने पर समय-वृद्धि नहीं दी जाएगी, इसके बावजूद अधिकारियों ने बिना कोई पेनल्टी (अर्थदंड) लगाए ठेकेदार को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया, जो शासकीय धन का सीधा दुरुपयोग है।
4. टुकड़ों में काम बांटकर चहेते ठेकेदारों को उपकृत करना
निगम के भीतर ₹50,000 से लेकर ₹70,000 तक के छोटे-छोटे (लघु) निर्माण कार्यों में निविदा (Tender) के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई। बड़े टेंडरों से बचने और चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर कराया जा रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग, दोषियों को बेनकाब करने की तैयारी
”भिलाई नगर निगम में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का घोर दुरुपयोग किया गया है। निर्वाचित सदन की शक्तियों को कुचलकर चहेते लोगों को फायदा पहुंचाया गया। हमने उप-मुख्यमंत्री जी से इस पूरे भ्रष्टाचार की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (E.O.W) से उच्च स्तरीय जांच कराने की अनुमति मांगी है ताकि दोषियों को बेनकाब कर सख्त कार्रवाई की जा सके।”
— दया सिंह, उपनेता प्रतिपक्ष, नगर पालिक निगम भिलाई
इस मामले में दया सिंह ने जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच के लिए दुर्ग कलेक्टर को भी पृथक से पत्र प्रेषित किया है। प्रतिपक्ष के इस आक्रामक रुख और सीधे E.O.W. जांच की मांग के बाद भिलाई निगम के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।









