अनिल साहू पाटन की रिपोर्ट ——
दुर्ग जिले के विकासखंड पाटन के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक ग्राम पंचायत तरीघाट से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। वर्ष 2010-11 में पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में मिले बहुमूल्य कल्चुरी कालीन अवशेष रहस्यमयी ढंग से गायब हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि ये अवशेष न सिर्फ तरीघाट के स्थानीय संग्रहालय से, बल्कि प्रदेश के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास संग्रहालय (रायपुर) से भी लापता हैं।
इस घोर लापरवाही को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार ध्यानाकर्षण कराए जाने के बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।
पुरातन सभ्यता को संजोय करोड़ों की ऐतिहासिक धरोहर का नहीं मिल रहा सुराग
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010-11 में जब तरीघाट में पुरातत्व विभाग ने उत्खनन कार्य शुरू किया था, तब यहाँ कल्चुरी सभ्यता से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। खुदाई में प्राचीन सिक्के, दुर्लभ मूर्तियाँ, कौड़ियां और प्राचीन धान के दाने बरामद हुए थे। इन बेशकीमती धरोहरों को सहेजने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक स्थानीय संग्रहालय का निर्माण भी किया गया था, जिसे देखने दूर-दराज से लोग आते थे। लेकिन आज की स्थिति में ये तमाम ऐतिहासिक अवशेष अपनी जगह से गायब हैं।
एसडीएम पाटन को कई बार पत्र, पर कार्रवाई शून्य–
तरीघाट के पूर्व सरपंच अशोक साहू ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक चोरी या लापरवाही की सूचना एक-दो बार नहीं, बल्कि चार से पांच बार पत्र के माध्यम से एसडीएम (SDM) पाटन को दी जा चुका है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक एसडीएम कार्यालय द्वारा इस विषय पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया और न ही गायब अवशेषों को ढूंढने के लिए कोई जांच कमेटी बनाई गई।
”हमारी पुरखों की थाती और कल्चुरी कालीन इतिहास को गायब कर दिया गया है। हमने एसडीएम साहब को बार-बार लिखित में शिकायत दी, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होना कई तरह के संदेह पैदा करता है।”
— अशोक साहू, पूर्व सरपंच, ग्राम तरीघाट
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 ने भी खड़े किए हाथ, शिकायत दर्ज करने से इनकार
प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि जब पूर्व सरपंच अशोक साहू ने बताया की सूबे के मुखिया की जनसुनवाई प्रणाली यानी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर फोन कर इस राष्ट्रीय महत्व की संपत्ति के गायब होने की शिकायत दर्ज करानी चाही, तो वहां भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। शासन-प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से क्षेत्र के इतिहासवेत्ताओं और आम जनता में गहरा रोष है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल:—-
आखिर कड़ी सुरक्षा और पुरातत्व विभाग की निगरानी के दावों के बीच ये अवशेष कहां गायब हो गए?
क्या गुरु घासीदास संग्रहालय जैसे सुरक्षित स्थान से भी अवशेषों का गायब होना किसी बड़े गिरोह की संलिप्तता की ओर इशारा करता है?
पाटन अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की इस मामले पर चुप्पी का कारण क्या है?
कल्चुरी सभ्यता छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास का अहम हिस्सा है। ग्राम पंचायत तरीघाट में मिले अवशेष इस बात का प्रमाण थे कि यह क्षेत्र प्राचीन समय में व्यापार और संस्कृति का बड़ा केंद्र था। अब देखना यह होगा कि इस समाचार के उजागर होने के बाद क्या शासन-प्रशासन की नींद टूटती है या फिर छत्तीसगढ़ का यह ऐतिहासिक वैभव हमेशा के लिए अंधकार में खो जाएगा।









