शहीद वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि, धनगांव में हुआ समर्पण-तर्पण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

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बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने के बाद प्रथम पितृ पक्ष के अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों एवं सर्व समाज की ओर से शहीद वीर सपूतों की स्मृति में समर्पण-तर्पण श्रद्धांजलि सभा एवं प्रदेश स्तरीय रामधुनी कार्यक्रम का आयोजन ग्राम धनगांव, जिला बेमेतरा में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सर्व समाज के लोग शामिल हुए और शहीद वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से आए दलों ने रामधुनी एवं अनेक झांकियों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। प्रतियोगिता में जय मां सरस्वती ग्राम सुतीयापाट ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसे अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, दुर्ग लोकसभा सांसद श्री विजय बघेल, विधायक श्री दीपेश साहू, विधायक श्री ईश्वर साहू, श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी, श्री विजय सिन्हा, श्री प्रीतपाल बेलचंदन, नरेंद्र दास गुरु, रामरूपदास महात्यागी, राधेश्याम दास एवं गुरु सर्वेश्वर दास जी सहित अनेक संत एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के अभियान में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि श्री विजय शर्मा के भीतर कर्मठता कूट-कूटकर भरी है और वे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रदेश में रामधुनी जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन के प्रथम गुरु माता-पिता होते हैं। खान-पान और संस्कारों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने समाज से गुटखा, तंबाकू और शराब जैसी नशे की प्रवृत्तियों को छोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘‘मनखे-मनखे एक समान’’ का संदेश हमें सामाजिक समरसता की प्रेरणा देता है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आज तर्पण-अर्पण का तीसरा दिन है। नक्सलवाद के समापन के बाद शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए बेमेतरा में समाज द्वारा चिंतन और स्मरण का यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा सहित प्रदेश के अनेक गांवों में रामधुनी की परंपरा रही है। ‘‘जय श्रीराम’’ और ‘‘जय सतनाम’’ की धारा में सभी का एक साथ जुड़ना हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि नक्सल उन्मूलन के दौरान बस्तर में अनेक जवानों और नागरिकों ने बलिदान दिया। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियां रहीं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कार्यक्रम के लिए 20 लाख रुपये की लागत से डोम शेड निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जा रही है।
मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय ने पितृ पक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने पूर्वजों का स्मरण और तर्पण हमारी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल कर्मकांड करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना को जीवन में धारण करना भी आवश्यक है। उन्होंने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक एवं सनातन परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति से सदियों से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमुदाय ने शहीद वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को स्मरण किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों एवं दलों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं सर्व समाज के लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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