विमल थापा भिलाई —-
भिलाई। देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर अश्लील गाने बजाकर नाचने-गाने से श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा को तकलीफ होती है।
इस विषय पर चर्चा करते हुए मीनू ने बताया कि इसीलिए उन्होंने आमजन को जागरूक और आस्था-श्रद्धा को मजबूत करने के लिए भिलाई के अनेक चौक-चौराहों पर तख्ती लेकर खड़े होकर जनता को समझाने का प्रयास किया है और यह प्रयास निरंतर जारी है।
उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं का स्वरूप धारण करना गलत नहीं है, उसका अश्रद्धा से प्रदर्शन करना गलत है। सनातन धर्म में इसको दो तरह से समझना चाहिए। शास्त्रीय परंपरा में स्वरूप धारण करना पवित्र माना गया है, यह भक्ति का ही एक रूप है।
रामलीला, रासलीला, भांड पाथेर में शिव, पार्वती, काली, हनुमान जी का स्वरूप धारण करके नाचना-लीला करना सदियों पुरानी परंपरा है, लेकिन उसके नियम हैं। जो स्वरूप धारण करता है उसे उस दिन उपवास रखना, सात्विक रहना, *मदिरा पान से दूर रहना* और मर्यादा में अभिनय करना पड़ता था। तब लोग उसे देवता समान पूजते थे।
आज समस्या स्वरूप से नहीं, विकृति से है। वर्तमान में विसर्जन और झांकियों में जो देखने को मिल रहा है उसके कारण मर्यादा का लोप हो रहा है। देवी-देवताओं के स्वरूप में सिगरेट-बीड़ी पीना, भद्दे फिल्मी गानों पर अश्लील नृत्य करना, नशे में झूलना – जब भक्त देखता है कि जिसके हाथ में त्रिशूल होना चाहिए उसके हाथ में बीड़ी है तो श्रद्धा को चोट लगती है।
जबकि स्थान-भाव की बात करें तो मंदिर के गर्भगृह में या कथा मंच पर किया गया तांडव भक्ति लगता है, वही डीजे पर फूहड़ गाने पर किया गया नृत्य तमाशा लगता है।
आज कई जगह स्वरूप धारण करना भक्ति नहीं, 500-1000 रुपए लेकर नाचने का पेशा बन गया है। जब मन में भाव-भावना ही नहीं है तो सामने वाले में भाव कैसे जागेगा।









