पाटन। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था का प्रतीक गौरा-गौरी महोत्सव की शुरुआत ग्राम तरीघाट में गुरुवार से हो गई है। महोत्सव के प्रथम दिवस बैगा द्वारा फूल कुचरने की पारंपरिक रस्म जाएगी। इस पारंपरिक अनुष्ठान के साथ ही गांव में गौरा-गौरी उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभ होगा। शिव शक्ति गौरा-गौरी समिति एवं समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
महोत्सव के अंतर्गत 6 एवं 8 नवंबर को विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के प्रथम प्रमुख चरण में शुक्रवार 6 नवंबर को शाम 4 बजे भगवान शिव-पार्वती एवं मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना की जाएगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे ग्रामीण सुआ नृत्य एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन होगा। साथ ही एकल नृत्य एवं सामूहिक नृत्य की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी, जो आयोजन में लोकसंस्कृति के रंग बिखेरेंगी।
महोत्सव के दूसरे चरण में रविवार 8 नवंबर की मध्यरात्रि 12 बजे से ढोल-नगाड़ों की मधुर धुनों के बीच गौरा-गौरी विवाह की रस्म निभाई जाएगी। इसके बाद सुबह 4 बजे ईश्वर गौरा-गौरी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। सुबह 8 बजे विधि-विधान के साथ गौरा-गौरी का विसर्जन किया जाएगा। शोभायात्रा एवं विसर्जन के दौरान मां कल्याणी धुमाल की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।
आयोजन को सफल बनाने में संरक्षक मंडल सहित समिति के पदाधिकारी एवं ग्रामवासी जुटे हुए हैं। कार्यक्रम के आयोजक जयप्रकाश सिन्हा, अध्यक्ष रेमन सिन्हा, उपाध्यक्ष डोमेश सिन्हा, कोषाध्यक्ष शेषनारायण सिन्हा, सचिव मोरध्वज सिन्हा, संयोजक प्रकाश गोस्वामी एवं सहसंयोजक चन्द्रकांत निषाद सहित शिव शक्ति गौरा-गौरी समिति के सदस्य तैयारियों में सक्रिय हैं। समिति ने आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों से सपरिवार शामिल होकर इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव की गरिमा बढ़ाने की अपील की है।
गौरा-गौरी महोत्सव के माध्यम से ग्राम तरीघाट में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति, सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे की अनूठी झलक देखने को मिलेगी।









