विमल थापा भिलाई ——-
गुरू तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी शताब्दी वर्ष के अवसर पर शहीद बाबा दीपसिंग गुरूद्वारा भिलाई सुपेला छत्तीसगढ़ में विशेष बैठक संपन्न हुई। बैठक का उद्देश्य महाराष्ट्र के नागपुर जिला के पारसीवनी (रामटेक) क्षेत्र में प्रस्तावित श्री गुरू तेग बहादुर गुरू विरासत धाम परियोजना (विश्व रिकॉर्ड) तथा विश्व के सबसे ऊँचे प्रस्तावित 350 फिट निशान साहिब के सम्बन्ध में जागरूकता फैलाना था।*
*बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न गुरुद्वारों के प्रधान प्रबंधक, कमेटी सदस्य, सेवादार तथा सिख समाज के लोग उपस्थित थे। यह बैठक का नेतृत्व श्री गुरमीत सिंह खोकर जी (नागपुर), यूथ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया गया। बैठक में श्री बाबुल डे (संयुक्त सचिव), मनीष पाटिल (संकल्पना) व छत्तीसगढ़ से सर्व श्री राहुल सिंग परिहार (छ: ग: प्रदेश अध्यक्ष), नालंद रामटेके (सचिव), रविकांत वर्मा (कार्यकारिणी सदस्य), रामकुमार (कार्य. सदस्य), अजय मेश्राम (कार्य. सदस्य), रामकुमार गुजर (कार्य. सदस्य), कमल गुप्ता (कार्य. सदस्य) आदि उपस्थित थे।*
*बैठक में उपस्थित गुरूद्वारा प्रबंधकों एवं सिख समाज के प्रतिनिधियों ने परियोजना को गुरू साहिब कि महान विरासत से जुड़ा ऐतिहासिक प्रयास बताते हुए इसका स्वागत किया।*
*छत्तीसगढ़ को विभिन्न गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक पहल को समाज की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया, जो कि इतिहास के रूप में जाना/पहचाना जाएगा।*
*विशेष रूप से यह संदेश सामने आया कि जब छत्तीसगढ़ के सिख समाज महाराष्ट्र में बनने वाले इस ऐतिहासिक प्रकल्प के लिए एकजुट होकर समर्थन व्यक्त कर रहे हैं। तब महाराष्ट्र सहित देश/विदेश के सिख समाज को भी इस महान मिशन में बढ़चढ़ कर सहभागिता निभानी चाहिए।*
*बैठक में उपस्थित छत्तीसगढ़ भिलाई (सुपेला) के विभिन्न गुरुद्वारों के प्रधान, सेवादार व सदस्य कुलदीप सिंह, हरपाल सिंह, बलविंदर सिंह, कुलवंत सिंह, तेजेंदर सिंह, गुरमीत सिंह, पलवंदर सिंह, भूपेंदर सिंह, गुरमेल सिंह, प्रजोत सिंह, आदि उपस्थित थे।*
*प्रमुख संदेश:- 350 वाँ शहीद वर्ष केवल स्मरण का अवसर नहीं बल्कि गुरू साहिब कि विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प है। श्री गुरु तेग बहादुर गुरू विरासत धाम (विश्व रिकॉर्ड) केवल महाराष्ट्र का नहीं बल्कि पूरे देश विदेश के सिख समाज का प्रकल्प है जब छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संगत एकजुट होगी तब गुरू विरासत का सपना अवश्य साकार होगा।*







