पाटन/एक तरफ जहां शासन और प्रशासन वनों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। पाटन वन विभाग के कार्यालय से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिम्मेदार अधिकारी अपने दफ्तरों में नदारद रहते हैं, और कार्यालय का जिम्मा सफाई कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। अधिकारियों की इस गैर-मौजूदगी का सीधा फायदा लकड़ी के तस्करों (कोचियों) को मिल रहा है, जो इन दिनों पूरी तरह सक्रिय हैं।
सफाई कर्मचारी संभाल रहे दफ्तर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाटन वन विभाग के कार्यालय में तैनात जिम्मेदार अधिकारी अक्सर अपने दायित्वों से गायब रहते हैं। स्थिति यह है कि कार्यालय आने वाले आम नागरिकों और ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं मिलता। कार्यालय के संचालन और देखरेख का जिम्मा सफाई कर्मचारियों के कंधों पर आ गया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रतिबंधित ‘कौहा’ पेड़ों की कटाई जारी
अधिकारियों की इस उदासीनता और लापरवाही के चलते क्षेत्र में लकड़ी के अवैध कारोबारियों (कोचियों) के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीण इलाकों में अंधाधुंध कटाई का दौर चल रहा है। पर्यावरण और वन संपदा के लिए अहम माने जाने वाले प्रतिबंधित ‘कौहा’ (अर्जुन) के पेड़ों को बिना किसी डर के काटा जा रहा है। प्रतिबंधित प्रजाति के इन पेड़ों की अवैध कटाई से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन विभाग की कार्यशैली भी कटघरे में खड़ी हो गई है।
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों में इस बात को लेकर कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने सुस्ती नहीं छोड़ी और इन अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई, तो क्षेत्र का हरा-भरा वातावरण और वन संपदा पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद वन विभाग के उच्चाधिकारी लापरवाह अमले और लकड़ी तस्करों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।








